ओलंपिक सिल्वर मेडलिस्ट पीवी सिंधु ने रविवार को जापान की नोज़ोमी ओकुहारा को लगातार गेम में 21-19, 21-17 से हराकर पहला बीएफ़डब्ल्यू वर्ल्ड टूर फ़ाइनल जीत लिया.
सिंधु का इस साल का यह पहला खिताब है. सिंधु इस साल अब तक कोई खिताब नहीं जीत सकी थी, लेकिन इस टूर्नामेंट में वो बेहतरीन फॉर्म में थीं और इस बार अपराजेय रहीं.
चीन के ग्वांग्जो में सिंधु और जापानी शटलर के बीच एक बार फिर ज़ोरदार टक्कर देखने को मिली. दोनों ही गेम में सिंधु ने तेज़ शुरुआत की, लेकिन ओकुहारा ने भी धैर्य नहीं खोया और सिंधु को कड़ी टक्कर दी.
करीब एक घंटा 2 मिनट तक चले इस मुक़ाबले में सिंधु ने पहले गेम में एकबारगी 14-6 की बढ़त हासिल कर ली थी, लेकिन फिर ओकुहारा ने ज़ोरदार वापसी और सिंधु के लिए अंक बटोरने मुश्किल कर दिए. देखते ही देखते स्कोर 16-16 पहुँच गया. आखिरी में हुई कश्मकश में बाज़ी सिंधु के हाथ लगी और 21-19 से गेम जीत लिया.
23 वर्षीय सिंधु ने सेमी फ़ाइनल में थाईलैंड की रतचानोक इंतानोन को 21-16, 25-23 के कड़े मुकाबले में हराकर लगातार दूसरे साल फ़ाइनल में जगह बनाई थी.
पिछले साल भी सिंधु का फ़ाइनल में मुक़ाबला ओकुहारा से ही था, लेकिन इस बार सिंधु ने जापानी खिलाड़ी की चुनौती ध्वस्त कर दी.
राज्य में किसी भी पार्टी की सरकार हो, किसानों के लिए उन्हें सरकारी ख़ज़ाने से पैसे देने में कोई भी हिचकिचाहट नहीं हो रही है. लेकिन किसानों के मुद्दों को सुलझाने में शायद वो फुर्ती नहीं दिख रही.
भारतीय रिज़र्व बैंक ने साफ़ किया है कि सरकारों की कर्ज़ माफ़ करने की नीति सही नहीं है. इससे बैंकों पर बुरा असर होता है और लोन लेने वाले आम लोगों की सोच पर भी प्रतिकूल असर होता है.
लेकिन रिज़र्व बैंक के तीखे शब्द नीति निर्धारण करने वालों पर कोई असर नहीं कर रहे हैं. लोन माफ़ करने के प्रति उनकी उदार नीति फिलहाल बदलती नहीं दिखाई दे रही.
सिर्फ़ किसानों के प्रति नरम रवैया नहीं, बड़े उद्योगों को दिए गए लोन के गड़बड़झाले को मिलाकर अब बैंकों के लिए सांस लेना दूभर सा हो गया है.
किसानों की कर्ज़माफ़ी और उद्योगों को दिए गए ऐसे लोन जो शायद वापस नहीं आएंगे, उन दोनों ने मिलकर ऐसी स्थिति पैदा कर दी है कि बैंकिंग प्रणाली कुछ समय से ख़तरे में दिखाई दे रही है
No comments:
Post a Comment