ने होटल के एक कर्मचारी पर आरोप लगाए हैं. पुलिस ने महिला की शिकायत पर रेप का मामला दर्ज किया है और अभियुक्त को तलाश कर रही है.
पुलिस के मुताबिक ये घटना चंडीगढ़ के इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी (आईटी) पार्क स्थित एक जाने माने होटल की है. ब्रिटिश महिला की उम्र 50 से 60 के बीच बताई गई है.
महिला की ओर से दी गई शिकायत के मुताबिक वो 20 दिसंबर को होटल में मसाज कराने गईं थीं. इसी दौरान उनका यौन शोषण किया गया.
इस मामले की जांच कर रहीं पुलिस अधिकारी हरजीत कौर ने बीबीसी को बताया कि पुलिस अभियुक्त को तलाश कर रही है.
पुलिस के अनुसार अभियुक्त की उम्र 20 साल करीब है और वो शहर के बाहरी इलाके में बसी कालोनी का रहने वाला है.
यौन संबंध नहीं बने फिर भी रेप का मामला दर्ज
पुलिस अधिकारियों ने बताया है कि इस मामले में यौन संबंध नहीं बने लेकिन फिर भी इस मामले को रेप क़ानून के तहत ही दर्ज किया गया है.
जांच अधिकारी हरजीत कौर ने इस बारे में बताया, ''इस मामले में उंगिलयों का प्रयोग हुआ है. देश में संशोधित रेप क़ानून के तहत ये मामला भी आईपीसी की धारा 376 के तहत दर्ज होगा.''
रेप क़ानून में ये बदलाव दिल्ली में हुए निर्भया रेप मामले के बाद हुआ था. पुलिस अधिकारी हरजीत कौर ने बताया कि पीड़ित महिला लगातार पुलिस की मदद कर रही हैं. वो अपने साथी के साथ ब्रिटेन से चंडीगढ़ आईं थीं.
हरजीत कौर ने ये भी बताया कि फिलहाल पीड़ित महिला अपने साथी के साथ शहर से बाहर चली गईं हैं. वो भारत में ही हैं या नहीं इसकी जानकारी पुलिस को नहीं है.
पुलिस ने पीड़ित महिला का बयान मजिस्ट्रेट के सामने पहले ही दर्ज कर लिया था.
इसी मामले की जांच में शामिल इंस्पेक्टर लखबीर सिंह ने बीबीसी को बताया कि इस तरह के मामलों में पीड़ित की पहचान ज़ाहिर नहीं की जाती इसलिए पुलिस ये नहीं बता सकती कि वो महिला ब्रिटेन में कहां की रहने वाली हैं.
इस बीच पुलिस ने होटल के के सीसीटीवी फ़ुटेज भी इकट्ठा किए हैं और होटल स्टाफ के बयान भी रिकॉर्ड किए हैं.
बीबीसी ने इस संबंध में होटल के जनरल मैनेजर से भी बात करने की कोशिश की लेकिन होटल की ओर से बताया गया कि फ़िलहाल वो बयान देने के लिए उपलब्ध नहीं हैं.
दस दिन में दूसरा मामला
देश में पिछले 10 दिन में इस तरह का ये दूसरा मामला सामने आया है. इसके पहले गोवा में ब्रिटेन की एक 48 वर्षीय पर्यटक के साथ रेप और लूटपाट करने की घटना सामने आई थी.
देश में महिलाओं की सुरक्षा के लिए क़ानून कड़े किए गए हैं लेकिन फिर भी उनके साथ हिंसा, रेप और यौन उत्पीड़न जैसी घटनाओं में कमी नहीं आ रही.
Monday, December 31, 2018
Wednesday, December 26, 2018
ग्लोबल टीचर प्राइज की दौड़ में दिल्ली की टीचर, मिलेंगे 7 करोड़!
ग्लोबल टीचर प्राइज की दौड़ में दिल्ली के सरकारी स्कूल की एक टीचर भी हैं. अगर वो ये अवॉर्ड जीत जाती हैं तो वो 10 लाख डॉलर यानी करीब 7 करोड़ रुपये के इस अवॉर्ड में भागीदार बन सकती हैं. दिल्ली की रहने वाली आरती कानूनगो शकरपुर के गवर्नमेंट गर्ल्स सीनियर सेंकेंडरी स्कूल में अंग्रेजी पढ़ाती हैं. आरती कानूनगो का नाम अभी टॉप-50 फाइनलिस्ट में से है.
आरती के टॉप-50 में पहुंचने पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उन्हें ट्विटर पर बधाई दी है. केजरीवाल ने ट्वीट करते हुए लिखा, '179 देशों में ग्लोबल टीचर प्राइज के टॉप-50 फाइनलिस्ट में पहुंचने पर आरती कानूनगो को बधाई. आपने दिल्ली के एजुकेशन सिस्टम को ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर जगह दिलाई है.'
वहीं आरती कानूनगो ने भी केजरीवाल का धन्यवाद किया है. साथ ही ट्वीट पर लिखा है, 'अरविंद केजरीवाल सर शुक्रिया. मैं आपके समर्थन ओर मोनिवेशन की आभारी हूं. अभी एक लंबा रास्ता तय करना बाकी है और मैं एजुकेशन सिस्टम को बेहतर करने के लिए कड़ी मेहनत करती रहूंगी.
बता दें कि दिल्ली सरकार ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ शिक्षिका के अवॉर्ड से सम्मानित किया था. वहीं आरती के साथ गुजरात के लावाड प्राइमरी स्कूल की जीवन कौशल शिक्षक स्वरुप रावल को इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए चुना गया. इस पुरस्कार की घोषणा मार्च में दुबई में ग्लोबल एजुकेशन एंड स्किल्स फोरम में की जाएगी.
फोटॉग्रफी के लिए इसमें 48 मेगापिक्सल का मुख्य कैमरा है. कंपनी ने इसमें SONY IMX 586 सेंसर यूज किया है जिसके तहत पिक्सल बाइनिंग टेक्नॉलजी से चार 0.8 माइक्रॉन पिक्सल को मिला कर लार्ज 1.6 माइक्रॉन पिक्सल दिया जाएगा. इसमें दिए गए चिपसेट की वजहे से 48 मेगापिक्सल AI HDR मोड मिलेगा जिससे हाई डेफिनिशन इमेज क्रिएट होंगी.
इस स्मार्टफोन में 4,000mAh की बैटरी दी गई है और कंपनी के मुताबिक ये स्मार्टफोन सुपर फास्ट चार्ज टेक्नॉलजी सपोर्ट करती है. इसमें Android Pie बेस्ड Magic UI 2.0 दिया गया है. हालांकि इसके ग्लोबल वर्जन में EMUI 9.0 दिया जाएगा.
कंपनी ने इसके साथ लिंक टर्बो फीचर दिया है. इसके जरिए बेहतर नेटवर्क स्पीड को देखते हुआ आपका स्मार्टफोन वाईफाई से LTE और LTE से वाईफाई में कनेक्ट होगा. ये फीचर स्मार्टफोन में दिए AI के तहत काम करता है और यूजर बिहेवियर को समझते हुए नेटवर्क चेंज करता है. यानी अगर मोबाइल इंटरनेट फास्ट है और वाईफाई स्लो तो ऐसे में ये स्विच करके LTE मे चला जाएगा. ये कंपनी का दावा है.
आरती के टॉप-50 में पहुंचने पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उन्हें ट्विटर पर बधाई दी है. केजरीवाल ने ट्वीट करते हुए लिखा, '179 देशों में ग्लोबल टीचर प्राइज के टॉप-50 फाइनलिस्ट में पहुंचने पर आरती कानूनगो को बधाई. आपने दिल्ली के एजुकेशन सिस्टम को ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर जगह दिलाई है.'
वहीं आरती कानूनगो ने भी केजरीवाल का धन्यवाद किया है. साथ ही ट्वीट पर लिखा है, 'अरविंद केजरीवाल सर शुक्रिया. मैं आपके समर्थन ओर मोनिवेशन की आभारी हूं. अभी एक लंबा रास्ता तय करना बाकी है और मैं एजुकेशन सिस्टम को बेहतर करने के लिए कड़ी मेहनत करती रहूंगी.
बता दें कि दिल्ली सरकार ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ शिक्षिका के अवॉर्ड से सम्मानित किया था. वहीं आरती के साथ गुजरात के लावाड प्राइमरी स्कूल की जीवन कौशल शिक्षक स्वरुप रावल को इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए चुना गया. इस पुरस्कार की घोषणा मार्च में दुबई में ग्लोबल एजुकेशन एंड स्किल्स फोरम में की जाएगी.
फोटॉग्रफी के लिए इसमें 48 मेगापिक्सल का मुख्य कैमरा है. कंपनी ने इसमें SONY IMX 586 सेंसर यूज किया है जिसके तहत पिक्सल बाइनिंग टेक्नॉलजी से चार 0.8 माइक्रॉन पिक्सल को मिला कर लार्ज 1.6 माइक्रॉन पिक्सल दिया जाएगा. इसमें दिए गए चिपसेट की वजहे से 48 मेगापिक्सल AI HDR मोड मिलेगा जिससे हाई डेफिनिशन इमेज क्रिएट होंगी.
इस स्मार्टफोन में 4,000mAh की बैटरी दी गई है और कंपनी के मुताबिक ये स्मार्टफोन सुपर फास्ट चार्ज टेक्नॉलजी सपोर्ट करती है. इसमें Android Pie बेस्ड Magic UI 2.0 दिया गया है. हालांकि इसके ग्लोबल वर्जन में EMUI 9.0 दिया जाएगा.
कंपनी ने इसके साथ लिंक टर्बो फीचर दिया है. इसके जरिए बेहतर नेटवर्क स्पीड को देखते हुआ आपका स्मार्टफोन वाईफाई से LTE और LTE से वाईफाई में कनेक्ट होगा. ये फीचर स्मार्टफोन में दिए AI के तहत काम करता है और यूजर बिहेवियर को समझते हुए नेटवर्क चेंज करता है. यानी अगर मोबाइल इंटरनेट फास्ट है और वाईफाई स्लो तो ऐसे में ये स्विच करके LTE मे चला जाएगा. ये कंपनी का दावा है.
Sunday, December 16, 2018
पीवी सिंधु ने रचा इतिहास, पहला वर्ल्ड टूर फ़ाइनल जीता
ओलंपिक सिल्वर मेडलिस्ट पीवी सिंधु ने रविवार को जापान की नोज़ोमी ओकुहारा को लगातार गेम में 21-19, 21-17 से हराकर पहला बीएफ़डब्ल्यू वर्ल्ड टूर फ़ाइनल जीत लिया.
सिंधु का इस साल का यह पहला खिताब है. सिंधु इस साल अब तक कोई खिताब नहीं जीत सकी थी, लेकिन इस टूर्नामेंट में वो बेहतरीन फॉर्म में थीं और इस बार अपराजेय रहीं.
चीन के ग्वांग्जो में सिंधु और जापानी शटलर के बीच एक बार फिर ज़ोरदार टक्कर देखने को मिली. दोनों ही गेम में सिंधु ने तेज़ शुरुआत की, लेकिन ओकुहारा ने भी धैर्य नहीं खोया और सिंधु को कड़ी टक्कर दी.
करीब एक घंटा 2 मिनट तक चले इस मुक़ाबले में सिंधु ने पहले गेम में एकबारगी 14-6 की बढ़त हासिल कर ली थी, लेकिन फिर ओकुहारा ने ज़ोरदार वापसी और सिंधु के लिए अंक बटोरने मुश्किल कर दिए. देखते ही देखते स्कोर 16-16 पहुँच गया. आखिरी में हुई कश्मकश में बाज़ी सिंधु के हाथ लगी और 21-19 से गेम जीत लिया.
23 वर्षीय सिंधु ने सेमी फ़ाइनल में थाईलैंड की रतचानोक इंतानोन को 21-16, 25-23 के कड़े मुकाबले में हराकर लगातार दूसरे साल फ़ाइनल में जगह बनाई थी.
पिछले साल भी सिंधु का फ़ाइनल में मुक़ाबला ओकुहारा से ही था, लेकिन इस बार सिंधु ने जापानी खिलाड़ी की चुनौती ध्वस्त कर दी.
राज्य में किसी भी पार्टी की सरकार हो, किसानों के लिए उन्हें सरकारी ख़ज़ाने से पैसे देने में कोई भी हिचकिचाहट नहीं हो रही है. लेकिन किसानों के मुद्दों को सुलझाने में शायद वो फुर्ती नहीं दिख रही.
भारतीय रिज़र्व बैंक ने साफ़ किया है कि सरकारों की कर्ज़ माफ़ करने की नीति सही नहीं है. इससे बैंकों पर बुरा असर होता है और लोन लेने वाले आम लोगों की सोच पर भी प्रतिकूल असर होता है.
लेकिन रिज़र्व बैंक के तीखे शब्द नीति निर्धारण करने वालों पर कोई असर नहीं कर रहे हैं. लोन माफ़ करने के प्रति उनकी उदार नीति फिलहाल बदलती नहीं दिखाई दे रही.
सिर्फ़ किसानों के प्रति नरम रवैया नहीं, बड़े उद्योगों को दिए गए लोन के गड़बड़झाले को मिलाकर अब बैंकों के लिए सांस लेना दूभर सा हो गया है.
किसानों की कर्ज़माफ़ी और उद्योगों को दिए गए ऐसे लोन जो शायद वापस नहीं आएंगे, उन दोनों ने मिलकर ऐसी स्थिति पैदा कर दी है कि बैंकिंग प्रणाली कुछ समय से ख़तरे में दिखाई दे रही है
सिंधु का इस साल का यह पहला खिताब है. सिंधु इस साल अब तक कोई खिताब नहीं जीत सकी थी, लेकिन इस टूर्नामेंट में वो बेहतरीन फॉर्म में थीं और इस बार अपराजेय रहीं.
चीन के ग्वांग्जो में सिंधु और जापानी शटलर के बीच एक बार फिर ज़ोरदार टक्कर देखने को मिली. दोनों ही गेम में सिंधु ने तेज़ शुरुआत की, लेकिन ओकुहारा ने भी धैर्य नहीं खोया और सिंधु को कड़ी टक्कर दी.
करीब एक घंटा 2 मिनट तक चले इस मुक़ाबले में सिंधु ने पहले गेम में एकबारगी 14-6 की बढ़त हासिल कर ली थी, लेकिन फिर ओकुहारा ने ज़ोरदार वापसी और सिंधु के लिए अंक बटोरने मुश्किल कर दिए. देखते ही देखते स्कोर 16-16 पहुँच गया. आखिरी में हुई कश्मकश में बाज़ी सिंधु के हाथ लगी और 21-19 से गेम जीत लिया.
23 वर्षीय सिंधु ने सेमी फ़ाइनल में थाईलैंड की रतचानोक इंतानोन को 21-16, 25-23 के कड़े मुकाबले में हराकर लगातार दूसरे साल फ़ाइनल में जगह बनाई थी.
पिछले साल भी सिंधु का फ़ाइनल में मुक़ाबला ओकुहारा से ही था, लेकिन इस बार सिंधु ने जापानी खिलाड़ी की चुनौती ध्वस्त कर दी.
राज्य में किसी भी पार्टी की सरकार हो, किसानों के लिए उन्हें सरकारी ख़ज़ाने से पैसे देने में कोई भी हिचकिचाहट नहीं हो रही है. लेकिन किसानों के मुद्दों को सुलझाने में शायद वो फुर्ती नहीं दिख रही.
भारतीय रिज़र्व बैंक ने साफ़ किया है कि सरकारों की कर्ज़ माफ़ करने की नीति सही नहीं है. इससे बैंकों पर बुरा असर होता है और लोन लेने वाले आम लोगों की सोच पर भी प्रतिकूल असर होता है.
लेकिन रिज़र्व बैंक के तीखे शब्द नीति निर्धारण करने वालों पर कोई असर नहीं कर रहे हैं. लोन माफ़ करने के प्रति उनकी उदार नीति फिलहाल बदलती नहीं दिखाई दे रही.
सिर्फ़ किसानों के प्रति नरम रवैया नहीं, बड़े उद्योगों को दिए गए लोन के गड़बड़झाले को मिलाकर अब बैंकों के लिए सांस लेना दूभर सा हो गया है.
किसानों की कर्ज़माफ़ी और उद्योगों को दिए गए ऐसे लोन जो शायद वापस नहीं आएंगे, उन दोनों ने मिलकर ऐसी स्थिति पैदा कर दी है कि बैंकिंग प्रणाली कुछ समय से ख़तरे में दिखाई दे रही है
Monday, December 10, 2018
गिराया जाएगा अलीबाग में मौजूद नीरव मोदी का अवैध बंगला, सरकार ने HC को बताया
पंजाब नेशनल बैंक घोटाले के मुख्य आरोपी नीरव मोदी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. महाराष्ट्र के राजगढ़ जिले में मौजूद नीरव मोदी के अवैध बंगले को महाराष्ट्र सरकार गिराने जा रही है. इस बात की जानकारी सरकार ने हाई कोर्ट को दी. सरकार ने इसका आदेश भी जारी कर दिया है. नीरव मोदी की ये बिल्डिंग अलीबाग बीच के पास है.
सरकारी वकील पी. बी. काकड़े ने मुख्य न्यायाधीश नरेश पाटिल और न्यायमूर्ति एम. एस. कार्णिक की बेंच को गुरुवार को बताया कि उस इलाके में राज्य और तटवर्ती क्षेत्र के नियमों का उल्लंघन कर बनाई गईं 58 अन्य निजी इमारतों को भी ढहाने का नोटिस भेजा गया है.
उन्होंने पीठ के पुराने आदेश के अनुपालन के संबंध में अदालत को यह जानकारी दी. गौरतलब है कि पीठ ने सरकार को यह बताने का निर्देश दिया था कि वह अलीबाग में बीच के किनारे बनी अवैध संपत्तियों के खिलाफ क्या कार्रवाई कर रही है.
महाराष्ट्र सरकार द्वारा नीरव मोदी के इस बंगले को गिराने का आदेश 4 दिसंबर को ही जारी कर दिया गया था. दरअसल, नीरव मोदी को अलीबाग क्षेत्र में 376 स्क्वायर मीटर के प्लॉट पर बंगला बनाने की परमिशन ली थी, लेकिन उसने 1071 स्क्वायर मीटर जगह का घेराव किया. अब सरकार द्वारा इस अवैध निर्माण को ढहाया जा रहा है.
गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले मध्य प्रदेश के एक निजी होटल में ईवीएम मशीन और सागर जिले में बिना नंबर की स्कूल बस से स्ट्रॉन्ग रूम में ईवीएम पहुंचाए जाने का वीडियो जारी करते हुए कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि बीजेपी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में जनादेश को पटलने की कोशिश कर रही है. वहीं, एक अन्य मामले में शुक्रवार को ही मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लगभग एक घंटे के लिए बिजली नहीं होने की वजह से स्ट्रॉन्ग रूम का सीसीटीवी और एलईडी डिस्प्ले इस अवधि में काम नहीं कर पाया.
इन शिकायतों पर चुनाव आयोग ने भी माना है कि मध्य प्रदेश में ऐसी दो घटनाएं हुईं थीं जिसमें ईवीएम को लेकर नियमावली का पालन नहीं किया गया. लेकिन आयोग का कहना था कि यह गलती प्रक्रिया तक ही सीमित है और मशीनों से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई. लेकिन आयोग ने एक अधिकारी को मशीने देरी से जमा कराने के आरोप में सस्पेंड कर दिया.
सरकारी वकील पी. बी. काकड़े ने मुख्य न्यायाधीश नरेश पाटिल और न्यायमूर्ति एम. एस. कार्णिक की बेंच को गुरुवार को बताया कि उस इलाके में राज्य और तटवर्ती क्षेत्र के नियमों का उल्लंघन कर बनाई गईं 58 अन्य निजी इमारतों को भी ढहाने का नोटिस भेजा गया है.
उन्होंने पीठ के पुराने आदेश के अनुपालन के संबंध में अदालत को यह जानकारी दी. गौरतलब है कि पीठ ने सरकार को यह बताने का निर्देश दिया था कि वह अलीबाग में बीच के किनारे बनी अवैध संपत्तियों के खिलाफ क्या कार्रवाई कर रही है.
महाराष्ट्र सरकार द्वारा नीरव मोदी के इस बंगले को गिराने का आदेश 4 दिसंबर को ही जारी कर दिया गया था. दरअसल, नीरव मोदी को अलीबाग क्षेत्र में 376 स्क्वायर मीटर के प्लॉट पर बंगला बनाने की परमिशन ली थी, लेकिन उसने 1071 स्क्वायर मीटर जगह का घेराव किया. अब सरकार द्वारा इस अवैध निर्माण को ढहाया जा रहा है.
गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले मध्य प्रदेश के एक निजी होटल में ईवीएम मशीन और सागर जिले में बिना नंबर की स्कूल बस से स्ट्रॉन्ग रूम में ईवीएम पहुंचाए जाने का वीडियो जारी करते हुए कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि बीजेपी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में जनादेश को पटलने की कोशिश कर रही है. वहीं, एक अन्य मामले में शुक्रवार को ही मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लगभग एक घंटे के लिए बिजली नहीं होने की वजह से स्ट्रॉन्ग रूम का सीसीटीवी और एलईडी डिस्प्ले इस अवधि में काम नहीं कर पाया.
इन शिकायतों पर चुनाव आयोग ने भी माना है कि मध्य प्रदेश में ऐसी दो घटनाएं हुईं थीं जिसमें ईवीएम को लेकर नियमावली का पालन नहीं किया गया. लेकिन आयोग का कहना था कि यह गलती प्रक्रिया तक ही सीमित है और मशीनों से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई. लेकिन आयोग ने एक अधिकारी को मशीने देरी से जमा कराने के आरोप में सस्पेंड कर दिया.
Tuesday, December 4, 2018
ऐसे 'सुपर डैड' से आप मिलना चाहेंगे
इन दिनों अगर आप जापान के अख़बारों, फ़ैशन पत्रिकाओं या टीवी के विज्ञापनों पर नज़र दौड़ाएं, तो आप को एक नया 'सुपरहीरो' देखने को मिलेगा.
ये सुपरहीरो मुस्कुराते हुए हैंडसम लोग हैं, जो नाश्ते पर तलवारबाज़ी का खेल खेलते हैं. अपने बच्चों के साथ पार्क में साइकिल चलाते हैं. कई बार तो पापा अपने बच्चों जैसे लिबास में भी नज़र आते हैं. वो हमदर्द हैं. समझदार हैं. जापान के ये नए सुपरहीरो बड़ी ख़ुशी-ख़ुशी खाना पकाते हैं और घर के दूसरे काम करते हैं.
इन्हें जापान में 'इकुमेन' कहा जाता है. इकुमेन दो शब्दों को जोड़ कर बनाया गया है. इकुजी यानी बच्चों की देख-भाल और इकेमेन यानी बलवान. ये इकुमेन पिता, पहले के दौर के कामकाजी जापानी मर्दों की छवि के ठीक उलट हैं.
पहले के पिता जहां काम के जुनून से भरे होते थे. वहीं आज इकुमेन पापा बनने की होड़ जापान के मर्दों में लगी है. ये शब्द सबसे पहले 2000 के दशक में एक विज्ञापन लिखने वाले ने गढ़ा था.
2010 में जापान के स्वास्थ्य, श्रम और कल्याण मंत्री ने राष्ट्रव्यापी इकुमेन प्रोजेक्ट शुरू किया. इसका मक़सद मर्दों में पारिवारिक जीवन के प्रति ज़्यादा लगाव पैदा करना था.
जल्द ही इकुमेन का विचार बहुत लोकप्रिय हो गया. आज जापान की लोक संस्कृति में ये बहुत चलन में आ गया है.
लेकिन, क्या इस शब्द की वजह से जापान के समाज में औरतों और मर्दों के बीच भेदभाव कम हुआ है?
या फिर, चटख, शोख़ और चमकीली तस्वीरों ने केवल ऊपरी तौर पर आए बदलाव को दिखाना शुरू किया है. जबकि हक़ीक़त में आज भी परिवार की ज़्यादा ज़िम्मेदारी महिलाएं ही उठा रही हैं?
पहले के ज़माने में जापान में मर्दों का काम केवल घर के लिए पैसे कमाना समझा जाता था. ये तनख़्वाह वाले लोग अपनी कंपनी के प्रति समर्पित होते थे. देर तक दफ़्तर में रुक कर काम करते थे, ताकि परिवार को आर्थिक सुरक्षा मिल सके और वो तरक़्क़ी की सीढ़ियां तेज़ी से चढ़ सकें.
हाल ही में जापान के समाज पर किताब, 'कूल जैपेनीज़ मेन' लिखने वाली हैना वसालो कहती हैं, 'काम के प्रति निष्ठा दिखाने वालों को ही जापान के समाज में आदर्श मर्द माना जाता था.'
वैसे, ऐसी सोच केवल जापान के समाज में नहीं पायी जाती. लेकिन, 1980 के दशक में भी जापान के पुरुष अपने बच्चों के साथ रोज़ औसतन चालीस मिनट से भी कम बातें किया करते थे. और ये बात भी आम तौर पर रात के खाने की टेबल पर हुआ करती थी.
एक रिसर्च के मुताबिक़ कई जापानी पुरुष तो चाय तक नहीं बना पाते थे. यहां तक कि वो बिना पत्नी की मदद के अपने कपड़े तक नहीं तलाश पाते थे. जब, पिता अपने बच्चों से बात भी करते थे, तो वो लगाव वाली नहीं हुआ करती थी. अक्सर वो आदेश देने वाली बातें हुआ करती थीं, ताकि बच्चे पिता का सम्मान करें और डरें.
ये सुपरहीरो मुस्कुराते हुए हैंडसम लोग हैं, जो नाश्ते पर तलवारबाज़ी का खेल खेलते हैं. अपने बच्चों के साथ पार्क में साइकिल चलाते हैं. कई बार तो पापा अपने बच्चों जैसे लिबास में भी नज़र आते हैं. वो हमदर्द हैं. समझदार हैं. जापान के ये नए सुपरहीरो बड़ी ख़ुशी-ख़ुशी खाना पकाते हैं और घर के दूसरे काम करते हैं.
इन्हें जापान में 'इकुमेन' कहा जाता है. इकुमेन दो शब्दों को जोड़ कर बनाया गया है. इकुजी यानी बच्चों की देख-भाल और इकेमेन यानी बलवान. ये इकुमेन पिता, पहले के दौर के कामकाजी जापानी मर्दों की छवि के ठीक उलट हैं.
पहले के पिता जहां काम के जुनून से भरे होते थे. वहीं आज इकुमेन पापा बनने की होड़ जापान के मर्दों में लगी है. ये शब्द सबसे पहले 2000 के दशक में एक विज्ञापन लिखने वाले ने गढ़ा था.
2010 में जापान के स्वास्थ्य, श्रम और कल्याण मंत्री ने राष्ट्रव्यापी इकुमेन प्रोजेक्ट शुरू किया. इसका मक़सद मर्दों में पारिवारिक जीवन के प्रति ज़्यादा लगाव पैदा करना था.
जल्द ही इकुमेन का विचार बहुत लोकप्रिय हो गया. आज जापान की लोक संस्कृति में ये बहुत चलन में आ गया है.
लेकिन, क्या इस शब्द की वजह से जापान के समाज में औरतों और मर्दों के बीच भेदभाव कम हुआ है?
या फिर, चटख, शोख़ और चमकीली तस्वीरों ने केवल ऊपरी तौर पर आए बदलाव को दिखाना शुरू किया है. जबकि हक़ीक़त में आज भी परिवार की ज़्यादा ज़िम्मेदारी महिलाएं ही उठा रही हैं?
पहले के ज़माने में जापान में मर्दों का काम केवल घर के लिए पैसे कमाना समझा जाता था. ये तनख़्वाह वाले लोग अपनी कंपनी के प्रति समर्पित होते थे. देर तक दफ़्तर में रुक कर काम करते थे, ताकि परिवार को आर्थिक सुरक्षा मिल सके और वो तरक़्क़ी की सीढ़ियां तेज़ी से चढ़ सकें.
हाल ही में जापान के समाज पर किताब, 'कूल जैपेनीज़ मेन' लिखने वाली हैना वसालो कहती हैं, 'काम के प्रति निष्ठा दिखाने वालों को ही जापान के समाज में आदर्श मर्द माना जाता था.'
वैसे, ऐसी सोच केवल जापान के समाज में नहीं पायी जाती. लेकिन, 1980 के दशक में भी जापान के पुरुष अपने बच्चों के साथ रोज़ औसतन चालीस मिनट से भी कम बातें किया करते थे. और ये बात भी आम तौर पर रात के खाने की टेबल पर हुआ करती थी.
एक रिसर्च के मुताबिक़ कई जापानी पुरुष तो चाय तक नहीं बना पाते थे. यहां तक कि वो बिना पत्नी की मदद के अपने कपड़े तक नहीं तलाश पाते थे. जब, पिता अपने बच्चों से बात भी करते थे, तो वो लगाव वाली नहीं हुआ करती थी. अक्सर वो आदेश देने वाली बातें हुआ करती थीं, ताकि बच्चे पिता का सम्मान करें और डरें.
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