Sunday, February 24, 2019

伦敦行会一瞥:隐秘、富可敌国、历史千年

伦敦贸易行会可以追溯到一千年前,它们拥有数十亿英镑的资产。但它们是否忘记了初衷之一——把钱花在公益事业上?

伦敦的金融城也是个古老的中心。在玻璃摩天大楼之间,有一些看上去非常宏伟的低层建筑大厅,它为找到这座城市的一部分不为人知的财富宝藏提供了一个线索。

伦敦金融城的同业公会曾经一度是个大杂烩,包括游说组织、监管机构和工会。现在它们变成了大不一样的组织,也专注于奖学金、教育和慈善。

它们代表了曾经主导伦敦的老行业。很多从名字看就容易辨认,比如屠夫行会,他们可以追溯到公元975年,还有鱼贩。

还有一些名字是已经消失的交易,比如针线布匹和制弓,它们过去主要从事布匹和长弓交易。所有的行会都会为它们的商品制定标准,并经常对它们所在城市的有关贸易拥有专营权,从而延伸到掌握运用其政治权力。

它们工作的另一面是福利和慈善,包括为已故成员举行葬礼、为穷人建立医院和住家。

如今,它们坐拥上百亿英镑的资产。这些资产是数十世纪以来由其成员捐赠的,其中包括前伦敦金融城市长迪克·惠廷顿的财富。

早在 1884年,经过一个皇家委员会的调查后,它们就被勒令在公益事业上花费更多的钱,否则就有可能面临解散。

但他们做到这点了吗?他们现在也是这么做的吗?

大卫·费里斯是酒业行会的成员,对这些行会的历史与潜力很有兴趣。他认为它们现在做得很不够。

他说:“我最喜欢它们的方面是:这些是很古老的机构,仍然很有活力地存在至今,并传承着古老的优秀传统。它们是文化瑰宝。”

然而,他说在这些最古老的机构中,有不少已经忘记了它们从中世纪以来的立身之本之一:公益。

他说:“它们大约从1700年开始就变成了绅士俱乐部。而且它们还拥有巨富。”

费里斯先生认为,这些古老的机构可能并没有发挥出它们的社会作用。

其中许多机构都投资于上市的公司里。有些机构拥有大量土地产权。其中最富有的是布匹行会,他们在科文特花园拥有许多条街的地产。

无公开帐目
商业地产数据公司 Datscha的数据显示,事实上,布匹和金匠行会分别是伦敦第55大和第73大的地主。在伦敦,它们是比英国第二大连锁超市Sainsbury's或者英国国家电网更大的土地所有者。

但这些公司不必向公众公开账目,许多老机构也不必提供账目。

尽管如此,英国广播公司(BBC)的调查还是从公开资料中发现,涉及到8家公司及其慈善机构分支一部分资产的公共记录显示出11亿英镑的资产。费里斯先生估计,伦敦110家同业公会公司的总资产加起来至少价值50亿英镑。

费里斯先生自己的行业公会——酒业行会的年度报告显示,在其2017年的210万英镑开支中,21万英镑用于慈善捐赠。费里斯先生说,这个数字太低了。

手工制作戒指的珠宝商卡斯特罗·史密斯在谈到金匠协会在当今行业中的作用时说:“它发挥重要作用,特别是在培训新人方面。这需要很长时间才能学习获得有关技能。行会在资金和培训方面提供了帮助,它是一个枢纽、一个保护伞、一个网络。”

对于较新的行会公司来说,情况可能大不相同。挖掘悠久的历史和永恒感,为行会公司提供了一个吸引捐款人为其慈善捐助的基础,并给公司一种信誉感。它们透明、健谈,热衷于展示自己的工作。

而许多新行会公司,比如艺术学者公司,都很小心地将从会员身上筹集的公司资金与从慈善渠道筹集的资金分开。

最年轻的行会公司、艺术学者公司的管理人员乔治娜·高夫说:“我们是鼓励教育。这确实也是我们的重点领域。” 这个公司汇集了学者、专家和交易商。

不过,对费里斯先生来说,老行会必须自我改革。

隐密可能对它们没有好处。费里斯表示,这些老行会的领导层会议——类似于现代公司董事会会议——内容是保密的。

老行会通常接受会员通常也是父辞子继。实际上,因为你的父亲是会员。现在更新的,以及更有眼光的行会公司则表示将努力避免这种组织方式。

费里斯说:“我们需要记住,我们资产的来源是中世纪时代人们的慈善。如果他们发现只有微不足道的数量用于公益,他们一定会深感震惊。”

Tuesday, February 19, 2019

इण्डेन की लापरवाही से कंपनी के 58 लाख ग्राहकों के आधार की डिटेल लीक: रिसर्चर

नई दिल्ली. फ्रांस के एक रिसर्चर ने दावा किया है कि सरकारी गैस कंपनी इण्डेन की लापरवाही से इसके 58 लाख से ज्यादा  ग्राहकों के आधार नंबर और अन्य डेटा लीक हो गए। रिसर्चर बैपटिस्ट रॉबर्ट ने मंगलवार को एलियट एल्डरसन नाम के ट्विटर हैंडल पर बताया कि लोकल डीलर्स के पोर्टल पर सत्यापन नहीं होने की वजह से इण्डेन के ग्राहकों के नाम, पते और आधार नंबर लीक हो रहे हैं। रॉबर्ट पहले भी आधार से जुड़े लीक का खुलासा कर चुके हैं।

11000 में से 9490 डीलर के डेटा हासिल किए

रॉबर्ट के मुताबिक पाइथन स्क्रिप्ट नाम के तकनीकी कोड के जरिए उन्होंने 11,000 डीलर्स के लॉगिन आईडी हासिल कर लिए। इनमें से 9,490 डीलर से जुड़े 58 लाख 26 हजार 116 ग्राहकों के डेटा अगले 1-2 दिन में ही एक्सेस हो गए। बाद में इण्डेन ने आईपी एड्रेस ब्लॉक कर दिया था।

रिसर्चर के मुताबिक आईपी एड्रेस ब्लॉक होने की वजह से वो बाकी 1,572 डीलर की जांच नहीं कर पाए। लेकिन, इनसे जुड़े ग्राहकों को भी शामिल किया जाए तो कुल 67 लाख 91 हजार 200 ग्राहकों का डेटा लीक हो सकता था।

11 महीने में दूसरी बार इण्डेन का डेटा लीक
यह दूसरी बार है जब इण्डेन गैस के ग्राहकों का डेटा लीक हुआ है। इससे पहले मार्च 2018 में भी कंपनी के ग्राहकों की डिटेल लीक हुई थी।

फिल्म के मेकर्स ने कहा-''नोटबुक की शूटिंग 2018 में अक्टूबर-नवंबर के महीनों में पूरी तरह से कश्मीर में की गई थी। हमारा पूरा दल मुख्य रूप से घाटी में भारतीय सेना, सीआरपीएफ और कश्मीर के लोगों के प्रयासों के कारण सुरक्षित रूप से फ़िल्म की शूटिंग को अंजाम दे सका, जिन्होंने लगातार यह सुनिश्चित किया है कि सबसे चरम परिस्थितियों में भी इस क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनी रहे। हम देश के लिए शहीद हो चुके हमारे वीर जवानों को श्रंद्धांजलि अर्पित करते है और इस मुश्किल घड़ी में हम शहीदों के परिवारों के साथ खड़े है।

नोटबुक 2019 में रिलीज होने वाली बॉलीवुड रोमांस-ड्रामा फ़िल्म है जिसमें जहीर इकबाल और प्रनूतन बहल मुख्य भूमिकाओं में नज़र आएंगे।

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता नितिन कक्कड़ द्वारा निर्देशित यह फ़िल्म सलमान खान, मुराद खेतानी और अश्विन वर्दे द्वारा निर्मित है। फ़िल्म नोटबुक 29 मार्च, 2019 को रिलीज होने के लिए तैयार है।

बॉलीवुड डेस्क. सोशल मीडिया पर शाहरुख खान को लेकर एक खबर तेजी से वायरल हुई कि शाहरुख ने पाकिस्तान के गैस पीड़ितों की मदद के लिए 45 करोड़ रुपए दिए थे। हालांकि यह खबर झूठी थी, लेकिन पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों की खबर से आहत लोगों ने शाहरुख को ट्रोल करना शुरू कर दिया।

अब शाहरुख का बचाव करने सोशल मीडिया पर हैशटैग के जरिए फैन्स और बॉलीवुड के सेलेब्स सामने आ गए हैं।

सेलेब्स ने किया सपोर्ट
फिल्म मेकर हंसल मेहता ने ट्वीट करते हुए लिखा कि- अभी-अभी कुछ गलत खबरें शाहरुख के बारे में देखीं। मैंने अभी तक ऐसा कोई स्टार नहीं देखा जो बिना किसी शोर के जरूरत पर लोगों की मदद करता है। जो झूठी खबरें फैला रहे हैं उनके लिए कहूंगा -स्टॉप फेक न्यूज अगेन्स्ट

एक्टर राहुल देव भी शाहरुख के सपोर्ट में आए हैं। उन्होंने ट्विटर पर लिखा- वे अपने काम के जरिए लोगों को पिछले 3 दशकों से प्रेरित कर रहे हैं। देश के असली ग्लोबल एम्बेसडर हैं शाहरुख। क्या आप सच में शाहरुख की छवि को इस तरह खराब कर सकते हैं ? बंद कीजिए झूठी खबरें फैलाना।

हालांकि शाहरुख के बचाव में आए फैन्स ने उनके द्वारा देश में कई मौकों पर की गई मदद के बारे में बता रहे हैं। कुछ का कहना है देश में एक ऐसा नेता बता दो, जिसने 12 गांव गोद लिए हों।

शाहरुख के मीर फाउंडेशन ने पिछले साल केरल में आई बाढ़ के दौरान सीएम रिलीफ फंड में 12 लाख रुपए डोनेट किए थे।

2015 में शाहरुख की कंपनी रेड चिलीज की ओर से 1 करोड़ रुपए चेन्नई में बाढ़ प्रभावितों की मदद के लिए सीएम रिलीफ फंड में दिए गए।

Wednesday, February 13, 2019

अल्बानिया: जब 14 सालों तक दिन-रात बनते रहे बंकर

फ़ोटोग्राफार रॉबर्ट हैकमैन ने कई बंकरों का एक संकलन तैयार किया है.

ज़्यादातर बंकर अल्बानिया के हैं जो 1975 से 1989 के बीच शीत युद्ध के दौरान बने थे.

एक अनुमान के मुताबिक़ बंकरों की संख्या पांच लाख है. कई बंकर तो आख़िरी अवस्था में हैं और कइयों का कैफ़े, घर, रेस्तरां, स्विमिंग पुल, अनाजघर, पुल और पानी टैंक के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है.

कई दशकों के कम्युनिस्ट शासन के दौरान ये मुल्क बाक़ी दुनिया से पूरी तरह से अलग-थलग रहा.

इसके वामपंथी तानाशाह एनवर होक्सहा को दुश्मनों का ऐसा ख़ौफ़ हुआ कि उसने पूरे देश में बंकर बनवा डाले.

अल्बानिया के गाइड एल्टन कॉशी मज़ाक़ में कहते हैं कि आज ये बंकर टूरिज़्म के विस्तार का ज़रिया बन गए हैं.

शीत युद्ध के दौरान की अनिश्चितता और परमाणु युद्ध की आशंका में कई देश सामना करने की तैयारी कर रहे थे. अल्बानिया के तानाशाह एनवर होक्सहा भी शीत युद्ध के दौरान सतर्क थे. इसी तैयारी के क्रम में अल्बानिया में बंकर बनाए गए थे.

यूं तो अल्बानिया का हज़ारों साल पुराना इतिहास है. पर आज 40 साल पुराना इतिहास, हज़ारों साल की विरासत पर भारी पड़ रही है.

आप अल्बानिया के एड्रियाटिक तट से देश के भीतरी हिस्से की तरफ़ बढ़ें, तो क़दम-क़दम पर बंकर बने हुए दिखेंगे. दीवारों के ऊपर गोलाकार ताज सा रखा हुआ है.

ये बंकर 1970 के दशक में बनाए गए थे. उस वक़्त अल्बानिया दुनिया से पूरी तरह से कटा हुआ देश था. इन्हें बनाने की सनक तानाशाह एनवर होक्सहा को उस वक़्त चढ़ी, जब अल्बानिया के रिश्ते सोवियत संघ से ख़राब हो गए.

एनवर को लगता था कि पड़ोसी देशों युगोस्लाविया और यूनान से लेकर अमरीका और सोवियत संघ तक, हर मुल्क उनके वतन पर चढ़ाई करने वाला है. इसी डर से एनवर होक्सहा ने पूरे देश की हिफ़ाज़त के लिए बंकर बनवाने शुरू कर दिए.

ये बंकर व्लोर की खाड़ी से लेकर राजधानी तिराना की पहाड़ियों तक पर बनाए गए हैं. मोंटेनीग्रो की सीमा से लेकर यूनान के द्वीप कोर्फू तक ये बंकर बने हुए हैं. मोटे अंदाज़े के मुताबिक़, पूरे देश में क़रीब पौने दो लाख बंकर एनवर होक्सहा के राज में बनवाए गए थे.

आज भी ये बंकर पूरे देश में बिखरे हुए हैं. पहाड़ियों से लेकर खेतों तक, हाइवे से लेकर समुद्र तट तक बंकरों का बोलबाला है. कहा जाता है कि एक बंकर बनाने में दो बेडरूम का मकान बनाने के बराबर ख़र्च आया होगा.

इन्हें बनाने की वजह से ही अल्बानिया यूरोप का सबसे ग़रीब देश बन गया.

इन बंकरों की ऐसी आर्थिक विरासत बनी जिसका बोझ अल्बानिया के लोग आज भी उठा रहे हैं. असल में एनवर होक्सहा ने अपने देश के लोगों को एक मंत्र दिया था-हमेशा तैयार रहो. उसका ये मिज़ाज दूसरे विश्व युद्ध में मिले तजुर्बे से बना था

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अल्बानिया को इटली की सेना ने केवल 5 दिन में हरा दिया था. हालांकि, इटली के कब्ज़े का विरोध अल्बानिया के लोगों ने छापामार लड़ाई के ज़रिए जारी रखा था.

युगोस्लाविया और ब्रिटेन-अमरीका की मदद से अल्बानिया के लोगों ने इटली और जर्मनी की सेनाओं पर हमले जारी रखे. इस छापामार लड़ाई के अगुवा एनवर होक्सहा ही थे.

जैसे-जैसे मित्र देशों की सेनाएं धुरी राष्ट्रों यानी जर्मनी और इटली पर भारी पड़ने लगीं, अल्बानिया के बाग़ी भी ताक़तवर होते गए. नवंबर 1944 में अल्बानिया फ़ासीवादी ताक़तों से आज़ाद होने में कामयाब हो गया. इस जीत का श्रेय जैसे-तैसे जुटाई गई 70 हज़ार लोगों की वामपंथी सेना को जाता है.

Tuesday, February 5, 2019

CBI बनाम ममता: क्या वाक़ई जीत गईं ममता बनर्जी, ख़त्म किया धरना

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने धरना ख़त्म करने की घोषणा कर दी है.

रविवार की रात से वो सीबीआई के ख़िलाफ़ धरने पर बैठी थीं. सीबीआई की एक टीम तीन फ़रवरी को कोलकाता के पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से शारदा चिट फंड घोटाले में पूछताछ करने आई थी.

इस टीम को कोलकाता पुलिस ने थाने में रोक लिया था और राजीव कुमार से पूछताछ नहीं करने दिया था. पूरे विवाद पर ममता ने केंद्र की मोदी सरकार पर सीबीआई का दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हुए धरने पर बैठने की घोषणा कर दी थी.

विवाद बढ़ा तो मामला सुप्रीम कोर्ट में गया. सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में अपील कर मांग की थी कि राजीव कुमार पूछताछ के लिए सामने आएं.

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई के बाद राजीव कुमार को अपना पक्ष रखने के लिए कहा है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राजीव कुमार को गिरफ़्तार नहीं किया जा सकता लेकिन उन्हें जांच में सहयोग करना होगा.

सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले को ममता ने कहा कि यह लोकतंत्र और संविधान की जीत है. ममता ने केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि यह देश बंदूक गोरक्षकों से नहीं चल सकता.

ममता ने धरना ख़त्म करने की घोषणा करते हुए कहा, ''सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला हमारी नैतिक जीत है. हम न्यायपालिका का सम्मान करते हैं. राजीव कुमार ने ऐसा कभी नहीं कहा है कि वो जांच में सहयोग के लिए तैयार नहीं हैं.''

सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई ने अवमानना की याचिका दायर की है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और डीजीपी को 18 फ़रवरी तक जवाब देने के लिए कहा है. ममता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से वो ख़ुश हैं.

ममता ने कहा, ''सीबीआई उन्हें गिरफ़्तार करना चाहती थी. वे राजीव कुमार के आवास पर एक गुप्त ऑपरेशन के तहत पहुंचे थे. आप बिना नोटिस दिए ऐसा नहीं कर सकते हैं. मैं कोर्ट के प्रति आभार प्रकट करती हूं.''

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और संजीव खन्ना की बेंच सीबीआई की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गई थी. सीबीआई का कहना था कि शारदा स्कैम की जांच में कोलकाता पुलिस कमिश्नर सहयोग नहीं कर रहे हैं.

Sunday, February 3, 2019

जब प्रदूषण छुपकर करता है आपके पेट पर 'वार'

हमारे पेट में बसने वाले तमाम जीवाणु, कीटाणु और प्रोटोज़ोआ का हमारी सेहत से गहरा ताल्लुक़ है. अरबों-खरबों की तादाद में रहने वाले इन छोटे जीवों का हमारे शरीर के अंगों की सेहत पर अच्छा और बुरा दोनों तरह का असर पड़ता है.

इन्हें अंग्रेज़ी में माइक्रोबायोम कहते हैं. पेट में पाए जाने वाले इन जीवों में से कौन अच्छे हैं और कौन बुरे, ये साफ़ नहीं है. लेकिन, वैज्ञानिक ये मानते हैं कि हमारे आस-पास की आबोहवा का असर इन पर पड़ता है. वायु प्रदूषण इनमें से एक है.

आज जबकि दुनिया भर में शहरों में प्रदूषण बढ़ रहा है, तो ज़ाहिर है कि इसका असर हमारे शरीर में पलने वाले इन जीवों पर भी पड़ रहा है. लेकिन, प्रदूषण के बुरे असर से प्रभावित माइक्रोबायोम हमारी सेहत पर कितना गहरा असर डालते हैं, इसकी पड़ताल की जा रही है.

डेनमार्क की कोपेनहेगेने यूनिवर्सिटी की वैज्ञानिक मैरी पेडरसन कहती हैं कि हमारी सेहत की बुनियाद बचपन में ही पड़ जाती है. लेकिन, हमारे पेट की सेहत का असर आगे चल कर हमारे रहन-सहन पर निर्भर करता है. हम जिस परिवेश में रहते हैं, उससे इन माइक्रोबायोम पर अच्छा या बुरा असर पड़ सकता है.

ख़राब असर की सूरत में हमारी आंतों में कई ऐसी बीमारियां जन्म ले लेती हैं, जिनका इलाज ही मुमकिन नहीं है. जैसे कि पेट में जलन. ये आंतों में अल्सर या फिर क्रोन्स नाम की बीमारी का नतीजा होता है.

ये ऐसी बीमारियां हैं, जो ताउम्र परेशान करती हैं. ये बीमारियां तब होती हैं जब हमारी रोगों से लड़ने की व्यवस्था नाकाम हो जाती है. या फिर शरीर ख़ुद को नुक़सान पहुंचाने लगता है.

ब्रिटेन की सेहत एक्सपर्ट जैना शाह कहती हैं कि एक ऐसे घाव की कल्पना कीजिए जो कभी भरता ही नहीं है. और ऐसा घाव आपके शरीर के भीतर होता है.

आंतों का अल्सर अक्सर बड़ी आंत में होता है. लेकिन क्रोन्स नाम की बीमारी पेट में कहीं भी हो सकती है. इसका असर हारमोन, पाचन क्षमता और शरीर की ऊर्जा पर भी पड़ता है. यही नहीं ये हमारी ज़हनी सेहत पर भी प्रभाव डालती है. जैना शाह कहती हैं कि क्रोन्स बीमारी का इलाज जीवन भर चलता रहता है. कई बार तो इससे निजात पाने के लिए सर्जरी तक करानी पड़ती है.

जैना शाह बताती हैं कि, 'क्रोन्स और आंतों का अल्सर हमें अपने मां-बाप के जीन से मिलता है. इन बीमारियों को बढ़ाने में हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता की नाकामी भी ज़िम्मेदार होती है. शायद इसकी वजह पर्यावरण में आया बदलाव भी होता है.'

रिसर्च कहती हैं कि पर्यावरण में बदलाव से हमारे खान-पान पर असर पड़ता है. तनाव बढ़ जाता है. जब हम बहुत बंद माहौल में रहते हैं, तो हमारे शरीर की रोगों से लड़ने की ताक़त ठीक से विकसित नहीं हो पाती.

कनाडा की कालगरी यूनिवर्सिटी के गिलाद काप्लान कहते हैं कि जीन के अलावा पर्यावरण के फैक्टर हमारे पेट में आबाद माइक्रोबायोम पर असर डालते हैं.

पेट में जलन के लिए हमारे 200 से ज़्यादा जीन ज़िम्मेदार हो सकते हैं. ये हमारी आंतों की दीवारों के गठन के लिए ज़िम्मेदार होते हैं. इनका ताल्लुक़ हमारी रोगों से लड़ने की ताक़त से भी होता है. क्योंकि आंतों की दीवारें बैक्टीरिया से मुक़ाबला करती हैं.

पेट की जलन पर रिसर्च करने वाले अब पर्यावरण प्रदूषण से इसका ताल्लुक़ तलाशने में जुटे हैं. क्योंकि ये पाया गया है कि पेट की ये बीमारी अक्सर शहरी लोगों को ज़्यादा होती है. ज़्यादा विकसित देशों के नागरिकों में ये बीमारी और भी ज़्यादा होती देखी गई है.

यूरोप और उत्तरी अमरीका के शहरों में रहने वाले ज़्यादा लोगों को पेट में जलन की बीमारी परेशान करती है. वहीं अफ्रीका, एशिया और दक्षिण अमरीका के तेज़ी से विकसित हो रहे देशों में ये मर्ज़ तेज़ी से बढ़ रहा है.

माना जाता है कि वायु प्रदूषण का असर पेट के जीवाणुओं पर होता है. गिलाद काप्लान ने इस बारे में ब्रिटेन में 900 लोगों पर रिसर्च की.

तीन साल तक चले तजुर्बे के बाद उन्होंने पाया कि जिन युवाओं का सामना नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड से ज़्यादा होता है, उनमें क्रोन्स बीमारी ज़्यादा होती है. वायु प्रदूषण का ताल्लुक़ अपेंडिसाइटिस और पेट के दर्द से भी पाया गया है.

इस रिसर्च में कमी ये है कि इसमें शामिल लोग लंबे वक़्त तक प्रदूषण के शिकार नहीं रहे हैं. ये भी साफ नहीं है कि वायु प्रदूषण से ही ये बीमारियां पैदा हुईं.

वायु प्रदूषण के लिए कार्बन मोनोक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और धूल, परागण, धुआं वगैरह ज़िम्मेदार होते हैं. ऐसे प्रदूषण से न सिर्फ़ बीमारियां हो रही हैं, बल्कि लोगों की मौत भी हो रही है.

लोगों को वायु प्रदूषण की वजह से फेफड़ों की बीमारी हो रही है, दिल के दौरे पड़ रहे हैं और डायबिटीज़, अस्थमा व अल्झाइमर जैसे मर्ज़ हो रहे हैं.

लेकिन, वैज्ञानिकों को अभी ये नहीं मालूम कि इन बीमारियों के लिए कौन से तत्व ज़िम्मेदार हैं.

Friday, February 1, 2019

मुंबई से 27 करोड़ रु. के हीरों की ठगी कर कुंभ में छिपा था दलाल, गिरफ्तार

यहां से 26 करोड़ 91 लाख रुपए के हीरों की ठगी करने के बाद कुंभ में छिपे दलाल यतीश पिचढ़िया को मुंबई पुलिस ने प्रयागराज से पकड़ लिया। गैंग के 5 अन्य अपराधियों को भी गिरफ्तार किया गया है। इनके पास से 21 करोड़ के हीरे भी बरामद हुए हैं। डीसीपी अनिल कुंभारे ने बताया कि आरोपी 23 कारोबारियों के हीरे लेकर भागा था, इसकी शिकायत 11 दिसंबर 2018 को दर्ज की गई थी।

आरोपी पर नजर रख रही थी पुलिस: पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी यतीश पिचढ़िया प्रयागराज के कुंभ मेले में साधु के वेश में छिपा हुआ था। पुलिस उसे ट्रैक करते हुए पहले कुंभ मेले पहुंची और फिर उसके पीछे वापस कल्याण आई। वह जैसे ही ट्रेन से उतरा मुंबई पुलिस ने उसे दबोच लिया। पूछताछ के बाद पुलिस ने उसके 5 अन्य साथियों को भी गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने इनके पास से 21 करोड़ के हीरे और 38 लाख रुपए कैश बरामद किया।

बचने की तैयारी भी कर ली थी: डीसीपी कुंभारे ने बताया कि आरोपी यतीश ने हीरा चोरी की साजिश तीन महीने पहले से ही बनाना शुरू कर दी थी। वह पुलिस की आंख में धूल झोंकना था। अगर उसे पकड़ लिया जाए तो बचने के लिए कानूनी सलाह भी ले रखी थी।

कई स्थानों पर गया था: पता चला है कि आरोपी प्रयागराज में कुंभ नहाने के साथ अजमेर, मथुरा, दिल्ली, चंडीगढ़, शिमला और भुवनेश्वर भी गया था। यतीश के अलावा पुलिस ने सुरेश मंदिशिया, कमील कुरेशी, इमरान खान, केतन परमार और विशाल श्रीवास्तव को गिरफ्तार किय है। ये सभी मुंबई और ठाणे के रहने वाले हैं।

रक्षा विभाग के प्रवक्ता ने कहा, जांच के आदेश दे दिए गए हैं। फिलहाल हादसे के सही कारणों का पता नहीं चल सका है। मृतक पायलटों की पहचान समीर एब्रोल और सिध्दार्थ नेगी के रूप में की गई। दोनों विमान और सिस्टम परीक्षण संस्थान में स्कॉर्डन लीडर थे।

एयरफोर्स का जगुआर प्लेन क्रैश
28 जनवरी 2019 को उत्तरप्रदेश के कुशीनगर के खेतिमपुर में एयरफोर्स का जगुआर प्लेन क्रैश हुआ था। हादसे के बाद प्लेन में आग लग गई थी। हालांकि, विमान के पायलट ने पैराशूट के जरिए अपनी जान बचा ली थी। ये सुपर सोनिक विमान जगुआर फ्रांस में बना था, जो कम ऊंचाई पर उड़ने में सक्षम है और दूर तक मार कर सकता है।

गुजरात में भी हुआ था हादसा
गुजरात के कच्छ में पिछले साल 5 जून को भारतीय वायुसेना का जगुआर एयरक्राफ्ट दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में एयर कमोडोर रैंक के अफसर संजय चौहान शहीद हो गए थे। बताया गया था कि एयरक्राफ्ट ने रुटीन ट्रेनिंग के लिए जामनगर से उड़ान भरी थी।

एयरफोर्स का जगुआर प्लेन क्रैश
28 जनवरी 2019 को उत्तरप्रदेश के कुशीनगर के खेतिमपुर में एयरफोर्स का जगुआर प्लेन क्रैश हुआ था। हादसे के बाद प्लेन में आग लग गई थी। हालांकि, विमान के पायलट ने पैराशूट के जरिए अपनी जान बचा ली थी। ये सुपर सोनिक विमान जगुआर फ्रांस में बना था, जो कम ऊंचाई पर उड़ने में सक्षम है और दूर तक मार कर सकता है।