Friday, November 16, 2018

BO पर TOH धाराशायी, 4 हफ्ते में बधाई हो ने कमाए 120 करोड़

बड़े बजट में बनी आमिर खान की फिल्‍म ठग्‍स ऑफ हिंदोस्‍तान का बॉक्‍स ऑफिस कलेक्‍शन गिरता जा रहा है. दर्शक और क्रिटिक्‍स के निगेटिव फीडबैक का सीधा असर फिल्‍म के कलेक्‍शन पर पड़ा है. फिल्म पूरी तरह से धाराशायी हो गई है.

फिल्म क्रिटिक तरण आदर्श ने फिल्म के कलेक्शन आंकड़े साझा किए हैं. फिल्‍म ने गुरुवार तक सभी भाषाओं में कुल  140.40 की कमाई कर ली है. बुधवार के मुकाबले भी फिल्म का कलेक्शन गुरुवार को कम रहा. बुधवार को फिल्म ने 3.5 करोड़ की कमाई की थी. जबकि गुरुवार को इसकी कमाई 2.60 करोड़ रही. इस हिसाब से फिल्म के हिंदी कलेक्शन की बात करें तो कुल 8 दिनों में फिल्म ने 134.95 करोड़ की कमाई कर ली है.

फिल्‍म का बजट 240 करोड़ है. बजट के हिसाब से इसकी कमाई को बहुत कमजोर माना जा रहा है. तरण आदर्श ने आने वाले कुछ दिनों में फिल्म की कमाई का अंदाजा लगाते हुए बताया है कि हिंदी में फिल्म की कमाई 150 करोड़ के आस-पास रहेगी. फिल्म से अब किसी भी करिश्मे की उम्मीद नहीं है. जबसे फिल्म रिलीज हुई है तबसे कमाई में पहले दिन के बाद से सिर्फ गिरावट ही दर्ज की गई है. बुधवार को कमाई में 19.54 % की गिरावट दर्ज की गई. वहीं गुरुवार को फिल्म की कमाई को 25.71 करोड़ का नुकसान हुआ.

बॉक्स ऑफिस पर ठग्स के साथ लगी बाकी फिल्मों की बात करें तो इसमें बधाई हो रिलीज के चौथे हफ्ते भी दम तोड़ने का नाम नहीं ले रही. फिल्म की कमाई शानदार रही है. तरण आदर्श ने फिल्म को ब्लॉकबस्टर घोषित कर दिया गया है.

बधाई हो के कलेक्शन की बात करें तो इसने पहले हफ्ते 66.10 करोड़ की कमाई की. दूसरे हफ्ते फिल्म की कमाई 28.15 करोड़ रही. तीसरे हफ्ते फिल्म की कमाई 15.35 करोड़ दर्ज की गई और चौथे मूवी ने 10.80 करोड़ रुपए कमाए. इस हिसाब से कुल कमाई 120.40 करोड़ हो गई है.

राजस्थान में जनसंघ के दिनों से ही प्रभावशाली राजपूत समाज बीजेपी का परंपरागत वोटबैंक रहा है. लेकिन हाल के दिनों में वसुंधरा राजे और राजपूत समाज के बीच रिश्ते में आई तल्खी बीजेपी के लिए चिंता का सबब बनी हुई है. ऐसे में बीजेपी विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के लिए 'राम' के नाम पर राजपूतों का दिल जीतने की जुगत में है.

राजपूतों की सियासी ताकत

बता दें कि राजस्थान में करीब 12 प्रतिशत राजपूत मतदाता हैं और तकरीबन तीन दर्जन विधानसभा सीटों पर उनका अच्‍छा-खासा प्रभाव है. वसुंधरा सरकार में राजपूत समुदाय से तीन कैबिनेट मंत्री और एक राज्य मंत्री हैं.

राजस्थान में राजपूतों को बीजेपी के करीबी लाने का श्रेय राजपूत नेता व पूर्व उपराष्‍ट्रपति भैरों सिंह शेखावत को जाता है. शेखावत तीन बार राजस्थान के मुख्‍यमंत्री रहे. राज्य की मौजूदा मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को राजनीति में लाने का श्रेय भी उन्हें दिया जाता है.

इन मुद्दों से नाराज हैं राजपूत

हालांकि राजमहल भूमि विवाद, पद्मावत फिल्म विवाद, गैंगस्‍टर आनंदपाल सिंह का एनकाउंटर और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के लिए केंद्रीय नेतृत्‍व की पसंद, गजेंद्र सिंह शेखावत का राजे द्वारा विरोध करने से राजपूतों की नारजगी की वजह मानी जा रही है.

विधायक व पूर्व केंद्रीय मंत्री व राजपूत नेता जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह ने बीजेपी छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है. ऐसे में वसुंधरा राजे की लगातार दूसरी सत्ता में वापसी की राह में सबसे बड़ी बाधा बने राजपूतों को साधने की रणनीति शुरू हो गई है.

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