Wednesday, January 23, 2019

डूबते रिश्तों की ख़बर दे देगी आपकी आवाज़

अगर आप का रिश्ता मुश्किल में होता है, तो आप उसे बचाने के लिए पुरज़ोर कोशिश करते हैं. आपस में बात करते हैं. मनोवैज्ञानिकों और रिश्तों के एक्सपर्ट से मशविरा करते हैं.

लेकिन, इन कोशिशों के दौरान आप के ज़ेहन में ये सवाल उठता है कि आख़िर, इन कोशिशों का नतीजा क्या होगा? कामयाबी मिलेगी या नहीं? रिश्ता बचेगा या नहीं?

इन सवालों के जवाब के लिए आपको कुछ देर ठहरना होगा और सुनना होगा. जब आपके पार्टनर बोल रहे हों, तो आपको उनकी आवाज़ को गंभीरता से सुनना होगा.

जब लोग बोलते हैं, तो उनकी आवाज़ के उतार-चढ़ाव से हमें उनके मनोभाव की झलक मिल जाती है.

आवाज़ के बीच ठहराव से लेकर जितनी तेज़ या धीमी आवाज़ में बोला जाता है, ये सभी इंसानों के ज़हन में चल रहे ख़यालात का संकेत देता है. किसी के एहसास को गुपचुप तरीक़े से बता जाता है.

इनमें से बहुत से संकेतों को तो हम बस अपनी छठी इंद्री की मदद से समझ जाते हैं. इन संकेतों की मदद से हम अपने शब्दों का हिसाब-किताब लगाते हैं, फिर बोलते हैं.

हम अनजाने में अपनी बातों से अपनी सोच का एहसास करा देते हैं. पर, बात यहीं तक सीमित नहीं है.

लोगों के बोलने से और भी छुपी हुई जानकारियां निकाली जा सकती हैं. वैज्ञानिकों ने ऐसी मशीनें बना ली हैं, जो आवाज़ में छुपे हुए राज़ का पता लगा सकती हैं. इनकी मदद से लोगों को बता सकती हैं कि उनका रिश्ता बचेगा या नहीं.

कई मामलों में तो ये आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस, तजुर्बेकार विशेषज्ञों पर भारी पड़ते हैं.

एक रिसर्च में वैज्ञानिकों ने 134 ऐसे जोड़ों को शामिल किया, जिनके रिश्ते मुश्किल दौर से गुज़र रहे थे.

अगले दो साल तक इन जोड़ों ने आपस में बातचीत का 10 मिनट का ऑडियो रिकॉर्ड किया. हर साथी ने एक विषय चुनकर उस पर अपनी राय रखी.

साथी को बताया कि वो क्यों बहुत अहम है. दो साल के इस तजुर्बे के बाद इन जोड़ों के रिश्ते बने या बिगड़े, वैज्ञानिकों के पास इसका भी हिसाब था.

इन जोड़ों की बीच बातचीत को विशेषज्ञों ने देखा. उन्होंने जोड़ों के बीच बातचीत, उनके हाव-भाव और शब्दों को बयां करने के अंदाज़ से पता लगाया कि उनका रिश्ता बच जाएगा या ख़त्म हो जाएगा.

इसी रिसर्च के दौरान आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (एआई) को भी इन जोड़ों की बातचीत में छुपे राज़ निकालने की ट्रेनिंग दी गई. आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस को इस बात की ट्रेनिंग दी गई थी कि वो लोगों के बोलने के अंदाज़, आवाज़ के वजन आदि से ये पता लगाए कि आख़िर रिश्ता चलेगा या नहीं.

ये मशीनें केवल आवाज़ की रिकॉर्डिंग के आधार पर किसी नतीजे पर पहुंचने वाले थे. इनके डेटा स्टोर में वीडियो वाली जानकारी नहीं डाली गई थी.

साथ ही इन मशीनों को जोड़ों के बीच बातचीत के मुद्दों से भी दूर ही रखा गया था. मशीनों को केवल, जोड़ों के बातचीत के अंदाज़, आवाज़ की रफ़्तार वगैरह की मदद से ये पता लगाना था कि रिश्ता टिकेगा या नहीं.

मज़े की बात ये है कि इन आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस से लैस मशीनों ने लोगों की बातचीत से कई ऐसी जानकारियां निकाल लीं, जो हम इंसान समझ नहीं सकते.

अमरीका की सदर्न कैलिफ़ोर्निया यूनिवर्सिटी के श्री नारायणन कहते हैं कि ढेर सारे आंकड़ों की मदद से इन मशीनों ने वो बातें गौर कर लीं, जो हमारी आंखों को नज़र नहीं आईं.

जोड़ों के बीच बातचीत की ट्रेनिंग दिए जाने के बाद ये आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस वाली मशीनें, रिश्तों के बारे में भविष्यवाणी करने के मामले में विशेषज्ञों से भी आगे निकल गईं. उनकी कामयाबी का प्रतिशत 79.3 था, जबकि असल एक्सपर्ट के रिश्तों को लेकर पूर्वानुमान 75.6 फीसद ही सही रहे.

श्री नारायणन कहते हैं कि हमारा दिमाग़ बहुत सारी जानकारियों को एक साथ ग्रहण कर सकता है लेकिन हम सभी जानकारियों की समीक्षा तो नहीं कर सकते.

मगर इस रिसर्च से एक बात साफ है. जब हम किसी से बात करते हैं, तो हम ऐसे कई संकेत देते हैं, जिससे हमारे ज़हन का अंदाज़ा हो जाता है. हमारी बातचीत में कई ऐसी चीज़ें छुपी हैं, जिनका पता सामने वाले को ही होता है. और इन्हें समझने का काम आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस से लैस मशीनें बेहतर ढंग से कर सकती हैं.

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के जानकार फियोला हेल्गाडोटिर का कहना है कि कंप्यूटर बड़े ढेर सारे आंकड़ों में से एक पैटर्न निकाल सकता है. वहीं, इंसान इसके पीछे की सोच के बारे में बता सकता है.

कई अक़्लमंद मशीनें, ढेर सारे आंकड़ों से नए संकेत निकाल लाती हैं. और ये संकेत तीन चौथाई तक सही होते हैं. ऐसे पूर्वानुमान से आपको ये अंदाज़ा होता है कि रिश्ता कितना टिकाऊ है.

Tuesday, January 15, 2019

कुंभ मेला 2019: कुल कितने अखाड़े हैं और क्यों उनको बनाना पड़ा?

आम तौर पर 'अखाड़ा' शब्द सुनते ही पहलवानी और कुश्ती का ध्यान आता है लेकिन कुंभ में साधु-संतों के कई अखाड़े हैं. ज़ोर-आज़माइश तो वहाँ भी होती है, लेकिन धार्मिक वर्चस्व के लिए.

शाही सवारी, रथ, हाथी-घोड़े की सजावट, घंटा-बाजे, नागा-अखाड़ों के करतब और यहाँ तक कि तलवार और बंदूक तक के प्रदर्शन होता है. इन दिनों प्रयागराज में साधु-संतों के अखाड़ों की धूम है. अखाड़ों के शिविरों में बहुत भीड़-भाड़ और रौनक है.

शुरु में केवल चार प्रमुख अखाड़े थे, लेकिन वैचारिक मतभेद की वजह से उनका बंटवारा होता गया और आज 13 प्रमुख अखाड़े हैं.

कुंभ अखाड़ों का ही है .कुंभ ऐसा अवसर है जहाँ आध्यात्मिक और धार्मिक विचार-विमर्श होता है. अखाड़े अपनी-अपनी परंपराओं में शिष्यों को दीक्षित करते हैं और उन्हें उपाधि देते हैं

श्रद्धालु जहाँ पुण्य कमाने की इच्छा लिए संगम पर पहुँचते हैं, वहीं साधुओं का दावा है कि वे कुंभ पहुंचते हैं गंगा को निर्मल करने के लिए. उनका कहना है कि गंगा धरती पर आने को तैयार नहीं थीं, जब उन्होंने धरती को पवित्र किया, तब गंगा आईं.

माना जाता है कि आदि शंकराचार्य ने सदियों पहले बौद्ध धर्म के बढ़ते प्रसार को रोकने के लिए अखाड़ों की स्थापना की थी. कहा जाता है कि जो शास्त्र से नहीं माने, उन्हें शस्त्र से मनाया गया.

लेकिन कहीं इस बात के ऐतिहासिक साक्ष्य नहीं मिलते कि आदि शंकराचार्य ने अखाड़ों की शुरुआत की. आदि शंकराचार्य का जीवनकाल आठवीं और नवीं सदी में था, अखाड़ों की स्थापना के बारे में तरह-तरह की कहानियां और दावे हैं, लेकिन पुख्ता तौर पर कुछ कहना मुश्किल है.

आवाह्‍न अखाड़ा, अटल अखाड़ा, महानिर्वाणी अखाड़ा, आनंद अखाड़ा, निर्मोही अखाड़ा, दशनामी, निरंजनी और जूना अखाड़ों का भी कई सदियों का इतिहास है. सभी अखाड़ों के अपने-अपने विधि-विधान और नियम हैं.

मोटे तौर पर 13 अखाड़े तीन समूहों में बँटे हुए हैं- शैव अखाड़े जो शिव की भक्ति करते हैं, वैष्णव अखाड़े विष्णु के भक्तों के हैं और तीसरा संप्रदाय उदासीन पंथ कहलाता है. उदासीन पंथ के लोग गुरु नानक की वाणी से बहुत प्रेरित हैं, और पंचतत्व यानी धरती, अग्नि, वायु, जल और आकाश की उपासना करते हैं.

अखाड़े जहां खुद को हिंदू धर्म के रक्षक के तौर पर देखते हैं, उनमें अनेक बार आपस में हिंसक संघर्ष हुए हैं, यह संघर्ष अक्सर इस बात को लेकर होता है कि किसका तंबू कहाँ लगेगा, या कौन पहले स्नान करेगा.

1954 के कुंभ में मची भगदड़ के बाद, टकराव और अव्यवस्था को टालने के लिए अखाड़ा परिषद की स्थापना की गई, जिसमें सभी 13 मान्यता-प्राप्त अखाड़ों के दो-दो प्रतिनिधि होते हैं, और आपस में समन्वय का काम इसी परिषद के ज़रिए होता है.

देश भर में बहुत सारे बाबा-संत-महंत और धर्मगुरू ऐसे हैं जिन्हें अखाड़ा परिषद मान्यता नहीं देता, अखाड़ा परिषद फ़र्ज़ी बाबाओं और स्वयंभू शंकराचार्यों की सूची जारी की थी और उन्हें ढोंगी बताया था.

Monday, January 14, 2019

खबर से परेशान हैं दिया मिर्जा, पूजा भट्ट ने कहा ये सब

बॉलीवुड के जाने माने निर्माता निर्देशक राजकुमार हिरानी पर उनकी एक महिला सहयोगी ने यौन उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगाया है. बॉलीवुड में हिरानी का बड़ा रुतबा है. उनके ऊपर उत्पीड़न के आरोप सामने आने के बाद एक बार फिर से मीटू पर चर्चा तेज हो गई है. लोग प्रतिक्रियाएं डे रहे हैं. एक्ट्रेस पूजा भट्ट ने कहा कि सोशल मीडिया पर आपबीती लिखने से अच्छा है कि महिलाएं पुलिस में जाकर शिकायत करें. हिरानी के साथ काम करने वाली दिया मिर्जा ने भी हैरानी जताई है.

न्यूज एजेंसी पीटीआई से एक बातचीत में पूजा भट्ट ने कहा, "मह‍िलाएं ट्विटर, फेसबुक या किसी अन्य सोशल मीड‍िया माध्यम पर अपनी आपबीती ल‍िखने से अच्छा होगा, पुल‍िस में श‍िकायत दर्ज करें. आरोपी पर कानूनी कार्यवाही करें. अगर किसी मह‍िला को कोई पुरुष परेशान करता है तो उसके लिए पुल‍िस है, जो आपकी सुरक्षा में हमेशा है. इन मुद्दों पर मीड‍िया ट्रायल की कोई जरूरत नहीं है."

पूजा भट्ट ने यह भी कहा, "समाज में अच्छे पुरुष भी हैं, लेकिन हर किसी को एक न‍िगाह से देखना गलत है. सबसे बड़ी बात ये समझना है कि औरतों की ये लड़ाई पुरुषों के ख‍िलाफ नहीं है. यह सही और गलत की लड़ाई है."

दिया मिर्जा ने क्या कहा?

संजू में राजकुमार हिरानी के साथ काम करने वाली एक्ट्रेस दिया मिर्जा ने भी पूरे मामले पर प्रतिक्रया दी है. पिंकविला से एक बातचीत में उन्होंने कहा कि मैं हिरानी सर को पंद्रह साल से जानती हूं. मैं उन्हें एक अच्छे इंसान के तौर पर जानती हूं. उन पर लगे आरोपों की खबर से मैं हिल गई हूं. इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए. बताते चलें कि दिया मिर्जा ने संजू में मान्यता दत्त का किरदार निभाया था.

उधर, आलोक नाथ पर गंभीर आरोप लगाने वाली व‍िनता नंदा ने भी हिरानी मामले के बाद प्रत‍िक्र‍िया दी है. उन्होंने ट्वीट में ल‍िखा,  "मीटू में एक नया नाम सामने आया है. यह बहुत ही परेशान करने वाला है. समझ नहीं आ रहा कि लड़कियां अब किस पर भरोसा करें. अब यह सब नहीं सहन होता है."

संजू अस‍िस्टेंट डायरेक्टर ने लगाए ह‍िरानी पर आरोप
बता दें कि हिरानी पर जिस महिला ने आरोप लगाया वह उनके साथ रणबीर कपूर की फिल्म संजू में बतौर अस‍िस्टेंट डायरेक्टर काम कर चुकी है. महिला के मुताबिक फिल्म के पोस्ट प्रोडक्शन के दौरान ह‍िरानी ने उसका उत्पीड़न जिया. हिरानी के साथ लंबे समय से सहयोगी रहे और 'संजू' के को-प्रोड्यूसर विधु विनोद चोपड़ा को महिला ने मेल लिखकर इस बारे में जानकारी दी थी. हालांकि हिरानी ने अपने वकील के जरिए महिला के सभी आरोपों को खारिज किया है.

हालांकि कांग्रेस के एमएलसी दिनेश सिंह और जिला पंचायत अध्यक्ष अवधेश सिंह ने पार्टी को छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया है. इसके अलावा हरचंद्रपुर से कांग्रेस विधायक राकेश सिंह भले ही बीजेपी ज्वॉइन नहीं किया हो, लेकिन वो कांग्रेस के साथ भी नहीं खड़े दिख रहे हैं.

बीजेपी ने 2019 में रायबरेली और अमेठी की घेराबंदी करने का प्लान बना रखा है.  बीजेपी नेता स्मृति ईरानी पिछले पांच साल से अमेठी में सक्रिय हैं. वो लगातार अमेठी का दौरा कर रही हैं और स्थानीय मुद्दों को उठाकर कांग्रेस आलाकमान को घेरती रहती हैं. इसी रणनीति के तहत बीजेपी ने सोनिया गांधी की संसदीय सीट से एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह को अपने साथ मिला लिया है. इन दिनों दिनेश सिंह कांग्रेस नेतृत्व को घेरने का काम कर रहे हैं.

Monday, January 7, 2019

12 करोड़ श्रद्धालुओं के स्वागत में कुंभ नगरी तैयार, योगी करेंगे अगवानी

यूपी के प्रयागराज में कुंभ मेले की तैयारी काफी जोरशोर से चल रही है. कुंभ नगरी को सुविधा संपन्न बनाने के लिए यूपी की योगी सरकार कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाह रही. अब तक 32 हेक्टेयर जमीन पर 1 लाख शौचालय तैयार हो चुके हैं. यहां अलग-अलग कार्यों में लगभग 20 हजार कंस्ट्रक्शन मजदूर और इतने ही साफ-सफाई कर्मचारी लगे हैं. कुंभ नगरी का त्रिवेणी संगम 40 हजार एलईडी लाइटों से जगमगा रहा है.

15 जनवरी से कुंभ 2019 का आगाज हो रहा है. हर तरह का कामकाज देखने के लिए अस्थायी प्रशासकीय दफ्तर बनाया गया है, जहां मेला अधिकारियों को डीएम जैसा अधिकार मिला है. कुंभ की तैयारी में पूरे प्रयागराज (पहले इलाहाबाद) में निर्माण कार्य तेजी से चल रहे हैं. पूरे शहर को रंग-रोगन किया जा रहा. आध्यात्मिक माहौल के लिए शहर की कई इमारतों को पेंट किया जा रहा है.

फुटपाथ और स्पीड ब्रेकर बनाए जा रहे हैं. शहर की सभी सड़कें होर्डिंग से अटी पड़ी हैं, जिन पर योगी आदित्यनाथ और उनकी पूरी कैबिनेट को मेला आने वाले श्रद्धालुओं का स्वागत करते दिखाया गया है. 49 दिन तक चलने वाले इस आयोजन में अपनी जगह बुक कराने के लिए हजारों लोगों की भीड़ मेला अधिकारी विजय किरण आनंद के दफ्तर के बाहर जमी दिखती है. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक धार्मिक संगठनों को कुंभ नगरी में सभी जरूरी सुविधाओं के साथ रहने के क्वार्टर मुहैया कराए गए हैं.

मेला अधिकारी आनंद ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि पूरी कुंभ नगरी को 20 सेक्टर में बांटा गया है जिनमें कुंभ कल्पवासियों के लिए 5 हजार कैंप बनाए जाएंगे. आनंद की मानें तो इस बार कुंभ में 12 करोड़ से ज्यादा लोग पधारेंगे. कुंभ नगरी के ज्यादातर इलाके जूना अखाड़ा और निर्मोही अखाड़े को सौंप दिए गए हैं. अस्पताल, कैंटिन और सांस्कृतिक कार्यक्रम के आयोजन स्थल के अलावा गंगा आरती के लिए भी खास जगह तय की गई है. पूरे प्रयागराज जिले में 38 से भी ज्यादा पांटून पुल बनाए गए हैं.

कुंभ नगरी के लगभग हरेक सेक्टर में पुलिस थाने और फायर ब्रिगेड की टीम तैनात की गई है. यहां 40 थाने बनाए गए हैं, जबकि पूरे प्रयागराज में 42 थाने हैं. 4 मार्च को संपन्न होने वाले कुंभ के लिए 20 हजार पुलिस बलों की तैनाती की गई है. पुलिसकर्मियों को भगदड़ जैसी दशा से निपटने के लिए खास ट्रेनिंग दी गई है. गुमशुदा लोगों की खोजबीन के लिए 15 खोया-पाया सेंटर बनाए जा रहे हैं. कुंभ नगरी का खास फोकस सेक्टर 18 पर है जहां वीआईपी गेट बनाया गया है. यहां 72 देशों के नुमाइंदे पधारेंगे जिनकी अगवानी खुद मुख्यमंत्री योगी करेंगे. रेतीले घाट पर बने इस सेंटर पर सभी 72 देशों के ध्वज लहरा रहे हैं.

9 महीने पहले ही यूनेस्को ने कुंभ मेले को सांस्कृतिक विरासत की श्रेणी में शामिल किया है. इसे देखते हुए यूपी सरकार दिल्ली की केंद्र सरकार से मदद लेकर अर्धकुंभ को यादगार और ऐतिहासिक बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती. देश के कोने-कोने की सांस्कृतिक झलक इस मेले में दिखे, इसके लिए केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने भी पूरी तैयारी की है. रामलीला और कृष्ण लीला के अलावा अंतरराष्ट्रीय बैले थीम पर आधारित कार्यक्रम भी कराने की योजना है. दुनिया भर से लोग कुंभ नगरी पहुंचे, इसके लिए संस्कृति मंत्रालय ने विज्ञापनों पर भी काफी जोर दिया है.